हिसार। सेवा और समर्पण का दूसरा नाम है नीलम सूंडा। डिफेंस कॉलोनी निवासी नीलम ने अपना जीवन गरीब, जरूरतमंद और वंचित तबके के लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वे 2012 से झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर बच्चों को शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनका मानना है कि स्वच्छता और शिक्षा ही समाज को नई दिशा दे सकते हैं। यही कारण है कि वे झुग्गी क्षेत्रों में जाकर बच्चों और महिलाओं को न केवल शिक्षा के लिए प्रेरित करती हैं, बल्कि स्वच्छता का महत्व भी समझाती हैं। लड़कियों के प्रति उनका समर्पण विशेष रूप से देखने लायक है। जब भी किसी झुग्गी में बेटी का जन्म होता है, वे स्वयं जाकर ‘छुछक’ देकर परिवार को सम्मानित करती हैं और उन्हें बेटियों को बराबरी का दर्जा देने के लिए प्रेरित करती हैं।

15 कन्याओं का भरा भात

नीलम अब तक 15 कन्याओं का भात भर चुकी हैं और उनकी शादियों में सहारा बनकर खड़ी रही हैं। उनकी कोशिश रहती है कि कोई भी गरीब परिवार बेटी की शादी में अकेला महसूस न करे। यही वजह है कि समाज में उन्हें एक संरक्षक और सच्चे मार्गदर्शक के रूप में जाना जाता है। शहर की कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी नीलम समय-समय पर अनाथ आश्रम, वृद्ध आश्रम और विशेष जरूरत वाले लोगों से मिलने जाती हैं। उनके प्रति उनका सहयोग और अपनापन समाज में प्रेरणा का स्रोत है। नीलम गरीब परिवारों की लड़कियों की सेहत को लेकर भी बेहद सजग रहती हैं। जरूरत पड़ने पर निजी खर्चे से डॉक्टर के पास लेकर जाती हैं और इलाज की जिम्मेदारी भी संभालती हैं।

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समाज में बराबरी के अधिकारी की हिमायती
नीलम सूंडा का एक और विशेष प्रयास सामाजिक भेदभाव को मिटाने की दिशा में है। वे समय-समय पर झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों को होटल और रेस्टोरेंट में लेकर जाती हैं, ताकि उन्हें यह महसूस हो सके कि समाज में सभी बराबर हैं और सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। सेवा और समर्पण से भरा उनका यह सफर समाज में एक नई सोच और प्रेरणा का संचार कर रहा है। नीलम ने साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ और जज्बा मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।